टेस्ट क्रिकेट अंत की ओर है, आईसीसी को अब जागने की जरूरत

ICC वर्ल्ड चैंपियनशिप का पहला सीजन अंतिम दौर में है। यह टूर्नामेंट का पहला और अंतिम सीजन होगा। क्योंकि इसमें किसी की दिलचस्पी नहीं दिख रही। ICC के अध्यक्ष ग्रेग बार्कले ने कहा था सुझाव दिया कि अब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप नहीं होगा। कारण साफ है। कुछ सालों में टेस्ट के प्रमुख देशों के प्रदर्शन में गिरावट। कुछ लोगों को लगा था कि न्यूजीलैंड में क्रिकेट अंत की तरफ है। पर पहले मैक्कुलम और फिर विलियम्सन ने अपनी टीम के स्तर को ऊपर उठाया है। हालांकि दूसरे देशों के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।

पाक और विंडीज का प्रदर्शन खराब होना टेस्ट के लिए झटका है। पाक के नए टेस्ट कप्तान बाबर आजम ने जरूर लगातार अच्छा किया है पर उसके पास पहले जैसे तेज गेंदबाज और स्पिनर नहीं हैं। विंडीज की स्थिति भी ऐसी ही है। एक समय विंडीज गेंदबाजों की वजह से बल्लेबाजों का सोना मुश्किल हो जाता था। अब टेस्ट में बेहतर करने के बजाय इन दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने पैसे के लिए दुनियाभर की टी20 लीग में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। टेस्ट को गंभीरता से लेने वाले देशों की संख्या सिर्फ चार रह गई है।

बिग-थ्री भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के अलावा न्यूजीलैंड। 2021 में इंग्लैंड और भारत को करीब 11-11 टेस्ट खेलने हैं। वहीं कई देश 4-5 टेस्ट भी नहीं खेलेंगे। क्या आईसीसी कुछ कर रहा है? बोर्ड इस मुद्दे पर क्यों आगे नहीं आ रहे? ऐसा रहा तो हम जल्द ही इस फॉर्मेट का अंत देख सकते हैं। आईसीसी अपनी राजनीति में व्यस्त है। उसे जल्द से जल्द कदम उठाना होगा।



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चंद्रेश नारायणन


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